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Bankipur Vidhansabha Bypoll 2026: बांकीपुर सीट पर RJD-कांग्रेस आमने-सामने, महागठबंधन में बढ़ी तकरार

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Alam Ki Khabar | बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर महागठबंधन में विवाद गहरा गया है। RJD और कांग्रेस दोनों ने इस सीट पर दावा ठोक दिया है। सीट शेयरिंग को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है।

पटना/आलम की खबर:बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव ने चुनावी मुकाबले से पहले ही सियासी तापमान बढ़ा दिया है। अभी चुनाव कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा भी नहीं हुई है, लेकिन महागठबंधन के दो प्रमुख सहयोगी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस इस सीट पर आमने-सामने आ गए हैं। दोनों दलों ने सार्वजनिक रूप से अपनी-अपनी दावेदारी पेश कर दी है, जिससे गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को लेकर नई बहस छिड़ गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि समय रहते इस विवाद का समाधान नहीं निकला तो इसका असर केवल बांकीपुर उपचुनाव तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आगामी चुनावी रणनीति पर भी पड़ सकता है।

सबसे पहले राष्ट्रीय जनता दल ने इस सीट पर अपना दावा पेश किया। पार्टी के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने स्पष्ट कहा कि बांकीपुर सीट पर राजद ही अपना उम्मीदवार उतारेगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में भी इस सीट पर राजद ने चुनाव लड़ा था और संगठन लगातार यहां सक्रिय रहा है। उनका कहना है कि महागठबंधन में सबसे बड़ी पार्टी होने के कारण इस सीट पर राजद का दावा स्वाभाविक और मजबूत है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पार्टी इस मुद्दे पर पीछे हटने के मूड में नहीं है।

राजद के इस बयान के कुछ ही समय बाद कांग्रेस ने भी पलटवार किया। कांग्रेस प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने कहा कि बांकीपुर कांग्रेस की पारंपरिक सीट रही है और इस क्षेत्र में पार्टी का ऐतिहासिक आधार रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी गठबंधन में सीटों का फैसला आपसी सहमति से होना चाहिए, न कि किसी एक दल की ओर से सार्वजनिक घोषणा करके। कांग्रेस ने साफ कर दिया कि वह अपनी दावेदारी आसानी से छोड़ने वाली नहीं है।

कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि यदि कोई दल सहयोगियों से बातचीत किए बिना अकेले फैसला सुनाता है तो यह गठबंधन की भावना के विपरीत है। पार्टी का मानना है कि सीट शेयरिंग पर अंतिम निर्णय शीर्ष नेतृत्व की बैठक में होना चाहिए। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि बांकीपुर सीट पर बातचीत आसान नहीं रहने वाली।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर का नाम भी चर्चा में है। उन्होंने पहले ही बांकीपुर से चुनाव लड़ने का संकेत दिया है। ऐसे में यदि महागठबंधन में सीट को लेकर सहमति नहीं बनती है तो मुकाबला और भी दिलचस्प हो सकता है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि इस सीट पर त्रिकोणीय संघर्ष की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

बांकीपुर विधानसभा सीट को राजधानी पटना की सबसे चर्चित सीटों में गिना जाता है। यहां शहरी मतदाताओं की संख्या अधिक है और चुनावी मुद्दे भी ग्रामीण क्षेत्रों से अलग होते हैं। विकास, रोजगार, ट्रैफिक, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाएं यहां के प्रमुख चुनावी मुद्दे रहे हैं। यही कारण है कि लगभग हर राजनीतिक दल इस सीट को प्रतिष्ठा का प्रश्न मानता है।

यह पहला अवसर नहीं है जब राजद और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर मतभेद सामने आए हैं। वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी कई सीटों पर दोनों दलों ने अलग-अलग दावे किए थे। कुछ स्थानों पर दोनों दलों ने अपने-अपने उम्मीदवार भी उतार दिए थे, जिससे महागठबंधन को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा था। अब बांकीपुर उपचुनाव में भी वैसी ही स्थिति बनने के संकेत दिखाई दे रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि महागठबंधन को आगामी चुनावों में मजबूती के साथ उतरना है तो सीट शेयरिंग को लेकर समय रहते स्पष्ट रणनीति बनानी होगी। सहयोगी दलों के बीच बढ़ता सार्वजनिक विवाद विपक्षी दलों को राजनीतिक हमला करने का अवसर भी दे सकता है।

दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। यदि महागठबंधन में विवाद बढ़ता है तो इसका चुनावी लाभ सत्तापक्ष को मिलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

फिलहाल दोनों दल अपनी-अपनी दावेदारी पर कायम हैं। हालांकि अंतिम फैसला महागठबंधन के शीर्ष नेतृत्व की बैठक में ही होगा। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आने वाले दिनों में सीट बंटवारे को लेकर कई दौर की बातचीत हो सकती है। यदि सहमति बन जाती है तो विवाद समाप्त हो जाएगा, लेकिन यदि गतिरोध जारी रहा तो बांकीपुर उपचुनाव बिहार की सबसे चर्चित राजनीतिक लड़ाइयों में शामिल हो सकता है।

बांकीपुर का यह उपचुनाव अब केवल एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं रह गया है। यह महागठबंधन की एकजुटता, नेतृत्व क्षमता और चुनावी रणनीति की भी परीक्षा माना जा रहा है। आने वाले दिनों में होने वाले राजनीतिक घटनाक्रम पर पूरे बिहार की नजर बनी रहेगी।

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बांकीपुर की लड़ाई, गठबंधन की परीक्षा

बांकीपुर उपचुनाव का महत्व केवल एक सीट जीतने तक सीमित नहीं है। यह महागठबंधन के भीतर तालमेल, नेतृत्व और राजनीतिक परिपक्वता की भी परीक्षा है। यदि सहयोगी दल समय रहते मतभेद सुलझा लेते हैं तो इसका सकारात्मक संदेश जाएगा। लेकिन यदि सार्वजनिक बयानबाजी जारी रहती है तो विपक्षी एकता पर सवाल उठना तय है। यही वजह है कि राजनीतिक जानकार इस सीट को आने वाले चुनावी समीकरणों का ट्रेलर मान रहे हैं।

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